सर्वोदय समाज
हिंदी है मेरे हिंद की धड़कन
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सर्वोदय समाज में आपका स्वागत है
 
सर्वोदय समाज एक संस्था नहीं, एक आंदोलन है | जो हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए पिछले १४ वर्षों से सतत प्रयासरत है | सर्वोदय समाज देश भर में फैली अशिक्षा साम्प्रदायिकता, आंतंकवाद, भ्रष्टाचार एवं क्षेत्रीयता के खिलाफ लोगों को जागरूक कर देश में एकता एवं अखंडता लाने का प्रयास कर रही है | पिछले १४ वर्षों से श्री अशोक कुमार के नेतृत्व में विभिन्न जगहों एवं प्रान्तों में जन आंदोलन के द्वरा सर्वोदय समाज लोगों को जागरूक कर रहा है |
आइए हम सब मिलकर इसे जन आंदोलन को और मजबूत करे एवं हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाएँ |
 
 
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राष्ट्र के नाम अध्यक्ष का संदेश
 
 
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है | भारत अनेक राज्यों एवं केन्द्र शासित परदेशो का देश है | जिनकी राजभाषा या प्रान्तीय भाषा अलग - अलग है | जैसे - कर्नाटक में कन्नड़, उड़ीसा में उड़िया, केरल में मलयालम, उत्तर परदेश, मध्यप्रदेश एवं बिहार में हिंदी इत्यादि | हमारा देश आजादी की ६४वीं वर्षगांठ पूरा कर चूका है | विशव में भारत ही एक मात्र ऐशा राष्ट्र है, जिसकी कोई राष्ट्रभाषा नहीं है, जो भारत के माथे पर कलंक है | महात्मा गाँधी जी ने कहा था की "कोई भी देश राष्ट्रभाषा के बिना गूंगा है |" इस संदर्भ में मेरी उक्ति इस प्रकार है "कोई भी देश, राष्ट्रभाषा के बिना विकास नहीं कर सकता है |"
आइए सब मिलकर हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाएँ
 
हिन्दी विश्व में बोली जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी भाषा है। पहले स्थान पर चीनी है, जबकि अंग्रेजी तीसरे स्थान पर है। भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह एक अत्यंत ही समृद्ध भाषा है। उत्तर भारत में हिमालय एवं दक्षिण में विंध्याचल, सतपुड़ा तक तथा सिंधु, गंगा व यमुना के विशाल मैदानों तक में इसका प्रसार है। जन-जन की जुबान पर आसीन हिन्दी भाषा ने भारत के लोगों को एक संस्कृति, कला, रीति-रिवाज एवं संपर्क का सहज सुलभ माध्यम प्रदान किया है। अनेकानेक विशेषताओं तथा सरलता, सहजता, समझने में आसान, लिखने तथा बोलने की एकरूपता, आमजन को भी स्वतः सहज समझ में आ जाना आदि के कारण करोड़ों लोगों की जुबान तक पहुंच पाने की समर्थता हिन्दी ने स्वयं में विकसित की। निरंतर इसके बोलने वालों की संख्या बढ़ रही है तथा यह विश्व की दूसरी बड़ी भाषा बन गई है।
 
इन्हीं सब विशेषताओं के दृष्टिगत हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा के दर्जे से सुशोभित किया जाता है, मगर वास्तविकता यही है कि आज हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा न देकर सिर्फ राजभाषा ही बनाया जा सका है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा इसे हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है।
 
 
स्वतंत्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343 (1) में इस प्रकार वर्णित हैः
 
 
 
 
 
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